• December 8, 2022 6:00 pm

प्रदेश के दो लाख कर्मचारियों हेतु बने अर्जित अवकाश बैंक

प्रदेश के दो लाख कर्मचारियों हेतु बने अर्जित अवकाश बैंक

मुख्य सचिव ने प्रदेश वित्त सचिव को कार्यवाही हेतु भेजा मामला

प्रदेश में दो लाख कर्मचारियों के लिए अर्जित अवकाश बैंक का प्रावधान किया जाए । दरअसल सरकारी कर्मचारियों को हर साल 20 से 30 दिन का अर्जित अवकाश मिलता है। यदि कर्मचारी अर्जित अवकाश नहीं लेते तो वह जुड़ता जाता है। लेकिन 300 दिन होने के बाद यह अवकाश जुड़ता नहीं। 300 दिन के बाद यदि कर्मचारी अवकाश नहीं लेते तो लैप्स हो जाता है। इससे नाराज कर्मचारी जयपाल फोगाट और जय भगवान ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका कर दी थी। उनका कहना था कि 300 दिन अर्जित अवकाश होने के बाद लैप्स करना अवैधानिक है। इस पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 300 दिन से अधिक अर्जित  अवकाश होने के बावजूद उसे रिटायरमेंट तक जोड़ने का आदेश सुनाया था ।

इस आदेश को हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों हेतु भी लागू करने के लिए हि0प्र0 राजकीय टीजीटी कला संघ ने प्रदेश मुख्य सचिव को मांग-पत्र भेजा था जिसे मुख्य सचिव श्री राम सुभग सिंह ने प्रदेश वित्त सचिव श्री प्रबोध सक्सेना को कार्यवाही हेतु भेजा है । यह जानकारी देते हुए संघ के प्रदेश महासचिव विजय हीर ने बताया कि 300 से अधिक अर्जित अवकाश होने पर उनको लीव बैंक में जोड़ने के लिए संघ ने पहल की है । अर्जित अवकाश के नकदी लाभ भले ही 300 अर्जित अवकाश तक हों मगर कर्मचारियों को ढलती उम्र में मेडिकल या अन्य स्थितियों में जब अर्जित अवकाश की जरूरत पड़ती है तो 300 से अधिक अर्जित अवकाश काम नहीं आते क्योंकि उनकी सर्विस बुक में लीव बैंक के रूप में ये अवकाश नहीं जुड़ते ।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसला देशभर के लाखों केन्द्र व राज्य कर्मचारियों के लिए नजीर बन गया है। इस आदेश से सरकारी कर्मचारियों में खुशी है। अर्जित अवकाश अधिक होने पर वे आपात स्थिति में इस्तेमाल कर सकेंगे। अर्जित अवकाश का यह बहुत बढ़िया आदेश है। यद्यपि इसे विभागीय अधिकारियों द्वारा सभी संबंधित आम शिक्षकों को यदि सहजता से प्रदान किया जाए तो तो इस आदेश की 100 प्रतिशत सार्थकता सिद्ध हो पाएगी। कर्मचारी भी निर्धारित कार्यावधि के अतिरिक्त कार्य करने में रुचि लेंगे और कार्यालयों में उपस्थिति दर बढ़ेगी । लीव बैंक न होने के चलते कर्मचारी 300 से ज्यादा अवकाश काट लेते हैं और कार्यालयों में उपस्थिति प्रभावित होती है । इससे कोई भी वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा।

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